Geeta thakur

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सुमित्रानंदन पंत जयंती




प्रतियोगिता हेतु लेख

सुमित्रानंदन पंत जयंती/विशेष

जन्म तिथि***20मई 1900
कौसानी अल्मोड़ा उत्तर पश्चिमी प्रांत बागेश्वर में हुआ था।
हिंदी जगत में छायावाद का आविर्भाव रविंद्र रविंद्र द्वारा प्रतिपादित विश्व बंधुत्व मानव एकता के विश्वव्यापी आंदोलन के माध्यम से हुआ। सुमित्रा पंत नंदन जी का मानना था कि मानव मन की परिस्थितियों में एकता संतुलन समन्वय तथा संयोजन लाने का गंभीर प्रश्न व्याधि युग से ही लेकर आज तक कर रहा है।
हिंदी साहित्य के प्रमुख चार स्तंभों में से एक हैं आप। सुमित्रानंदन पंत जी को एक प्राकृतिक सौंदर्य के रूप में भी जाना जाता है। वे निरंतर गतिशील रहे। पंत जी का काव्य का प्रदेय विश्व एकता मानव एकता का जयघोष कराता है। नवीन आशा उल्लास सौंदर्य से भरी आपकी रचनाएं।
पंत जी की प्रमुख रचनाएं, जिसमें 1969 में ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला।
1ग्रंथि=1920, वीणा=1927,
पल्लव=1928, गुंजन=1932,
युगान्त=1936, युग वाणी=1939
ग्राम्या=1940, स्वर्ण किरण=1947
स्वर्ण धूलि=1947, उत्तरत1949
युग पंथ 1948, अतिमा=1955
रजत, शिखर, कला और बूढ़ा चांद अनेक रचनाएं हमे प्रदान की हैं। सदेव आप से प्रेरित रहेंगे। कला और बूढ़ा चांद जैसी काव्य से आध्यात्मिकता की सहज अनुभूति प्रगट होती है।
ताजमहल पर भारतीय और विदेशी कवियों ने अलग-अलग तरह की कविताएं लिखी लेकिन पंत जी की कविता रचना मानवतावाद में एकदम जुड़ी हुई है वे कहते हैं कि =हाय! मृत्यु का ऐसा अमर अप आर्थिक पूजन?
आत्मा का अपमान प्रेत और छाया प्रति
शव को दे हम रूप रंग मानव का।*
ऐसी नव विचार धारा के धनी व्यक्तित्व था।
आप को शत शत नमन करे समस्त काव्य जगत

🙏🙏💐💐💐💐💐💐
गीता ठाकुर दिल्ली से

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7 Comments

Alka jain

04-Jun-2023 12:57 PM

V nice 👍🏼

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Mohammed urooj khan

25-May-2023 01:14 PM

👌👌👌👌

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वानी

25-May-2023 11:36 AM

Nice

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